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भारत में निर्मित C-295 विमान: भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को नई उड़ान

भारत में निर्मित C-295 विमान: भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को नई उड़ान

सोचिए एक पल के लिए।

वह देश जो कभी हर छोटी-बड़ी रक्षा ज़रूरत के लिए विदेश की तरफ देखता था, आज उसी देश में एक सैन्य विमान बनकर उड़ान भर रहा है।

यह खबर सुनने में साधारण लग सकती है। लेकिन है नहीं।

यह भारत के लिए एक बड़ा मोड़ है।

 

पहले थोड़ा पुराना हिसाब

भारतीय वायुसेना के पास एव्रो-748 नाम के पुराने विमान थे। ये विमान दशकों पुराने हो चुके थे। इन्हें बदलना ज़रूरी था।

सवाल यह था: बदलेंगे कैसे?

पहले का जवाब होता: विदेश से खरीद लो।

इस बार जवाब अलग था: भारत में बनाओ।

 

C-295 है क्या?

C-295 एक मध्यम आकार का सैन्य परिवहन विमान है।

यह सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता है। ज़रूरी सामान ढोता है। घायलों को निकालता है। और ज़रूरत पड़े तो पैराट्रूपर्स को भी उतारता है।

एक बार में 70 सैनिक। या 48 पैराट्रूपर्स। या 24 मेडिकल स्ट्रेचर। या करीब 10 टन सामान।

और सबसे खास बात, यह सिर्फ 670 मीटर के छोटे रनवे से भी उड़ान भर सकता है। मतलब पहाड़ी इलाके। सीमावर्ती क्षेत्र। दूर-दराज की हवाई पट्टियाँ। जहाँ बड़े विमान नहीं जा सकते,  वहाँ यह जाएगा।

दो प्रैट एंड व्हिटनी PW127G इंजन लगे हैं। एक बार में करीब 11 घंटे उड़ सकता है। आधुनिक रडार है। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली है। समुद्री निगरानी भी कर सकता है।

सीधे शब्दों , यह एक बहुत काम का विमान है।

 

सौदा कब और कैसे हुआ?

सितंबर 2021 में भारत ने स्पेन के साथ एक समझौता किया।कुल 56 C-295 विमान। कीमत करीब 21,935 करोड़ रुपये। इनमें से 16 विमान स्पेन में बनकर आएँगे। और बाकी 40, भारत में बनेंगे।

यही वह फैसला था जिसने सब कुछ बदल दिया।

अक्टूबर 2024 में गुजरात के वडोदरा में एक नया निर्माण संयंत्र खुला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने मिलकर इसका उद्घाटन किया।

और उसी संयंत्र से निकला, पहला विमान। भारत में बना। भारतीयों के हाथों से बना।

टाटा और एयरबस: एक अलग किस्म की जोड़ी

इस विमान को बनाया है टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड यानी TASL ने। साथ में है एयरबस।

यह भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है।

पहली बार किसी सैन्य विमान का निर्माण भारत में किसी निजी कंपनी ने किया है।

सरकारी कारखाना नहीं। विदेशी ज़मीन नहीं। एक भारतीय निजी कंपनी। वडोदरा की ज़मीन पर। भारतीय इंजीनियरों के दिमाग से।

और सिर्फ टाटा अकेले नहीं हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट में 125 से ज़्यादा भारतीय कंपनियाँ जुड़ी हैं। छोटी कंपनियाँ। बड़ी कंपनियाँ। हर किसी का कुछ न कुछ हिस्सा इस विमान में है।

इसका मतलब है रोज़गार। तकनीक। अनुभव। और आत्मविश्वास।

वायुसेना ने क्या कहा?

भारतीय वायुसेना ने इस पहली परीक्षण उड़ान पर पूरी टीम को बधाई दी।

उनका कहना था, यह सफलता भारत की बढ़ती एयरोस्पेस क्षमता को दिखाती है।

बड़े शब्द नहीं। बस एक सच्ची तारीफ।

और यह तारीफ मायने रखती है। क्योंकि जो लोग इस विमान को इस्तेमाल करेंगे, उन्होंने खुद कहा कि यह काबिल है।

यह सिर्फ एक विमान नहीं है

यहाँ रुककर सोचिए।

भारत दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक रहा है। दशकों तक। हम खरीदते रहे। दूसरे बनाते रहे।

यह स्थिति बदलनी थी।

C-295 उस बदलाव की एक ठोस शुरुआत है।

यह सिर्फ एक विमान नहीं है। यह एक संदेश है। भारत की अपनी क्षमता का संदेश। यह साबित करता है कि हम सिर्फ खरीदार नहीं, अब हम बनाने वाले भी हैं।

मेक इन इंडिया। आत्मनिर्भर भारत।

ये शब्द अब सिर्फ भाषणों में नहीं हैं। एक विमान उड़कर इन्हें सच साबित कर चुका है।

 

आगे क्या?

40 विमान भारत में बनने हैं। यह पहला था। 39 और आएँगे।

हर विमान के साथ अनुभव बढ़ेगा। हर विमान के साथ भारतीय इंजीनियरों का हुनर और पक्का होगा। हर विमान के साथ यह देश रक्षा क्षेत्र में थोड़ा और मज़बूत होगा। 

और एक दिन शायद वह भी आए ,  जब भारत अपना पूरी तरह से स्वदेशी सैन्य परिवहन विमान बनाए। बिना किसी विदेशी साझेदार के।

वह दिन दूर नहीं लगता।

आखिरी बात

वडोदरा के उस कारखाने में जब पहला C-295 उड़ान भरने के लिए तैयार हुआ, तो वह सिर्फ धातु और इंजन का एक टुकड़ा नहीं था।

वह उन सब लोगों की मेहनत थी जिन्होंने सालों तक इस पर काम किया।

वह उस सपने की शुरुआत थी जो भारत ने बहुत पहले देखा था।

और वह एक जवाब था,  उन सबको जो कहते थे कि भारत में यह नहीं हो सकता।

हो सकता है। हो गया।

 

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